📖 शरंग पक्षियों की कथा – भाग 1
एक महान ऋषि थे जिनका नाम माण्डपाल था। वे सभी शास्त्रों के ज्ञाता, कठोर व्रतों का पालन करने वाले, तपस्वी और अत्यंत धर्मात्मा थे। उन्होंने अपने सभी इन्द्रियों को वश में रखकर तप और अध्ययन में जीवन समर्पित कर दिया।
तपस्या की पराकाष्ठा प्राप्त कर वे शरीर त्यागकर पितरों के लोक में पहुँचे। परन्तु वहाँ उन्हें अपने कर्मों का फल प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने देवताओं से पूछा— “मैंने तप और धर्म के कार्य किए, फिर भी मुझे इन लोकों का फल क्यों नहीं मिल रहा?”
देवताओं ने उत्तर दिया— “मनुष्य तीन ऋण लेकर जन्म लेता है— देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। इन ऋणों से मुक्ति यज्ञ, तप और संतान से होती है। तुमने तप और यज्ञ तो किए, परन्तु तुम्हारी कोई संतान नहीं है। इसी कारण तुम्हें इन लोकों का फल नहीं मिला।”
यह सुनकर माण्डपाल ने विचार किया कि शीघ्र अधिक संतान प्राप्त करने का उपाय क्या हो सकता है। उन्होंने देखा कि पक्षियों में सबसे अधिक संतति उत्पन्न होती है।
📖 शरंग पक्षियों की कथा – भाग 2
इसलिए माण्डपाल ने शरंग पक्षी का रूप धारण किया और जरिता नाम की एक पक्षी के साथ संयोग किया। उनसे चार पुत्र उत्पन्न हुए— जरितारी, सरिसृक्का, स्तम्भमित्र और द्रोण।
परन्तु माण्डपाल ने उन्हें अंडों में ही छोड़ दिया और दूसरी पत्नी लपिता के पास चले गए।
उधर जरिता अपने बच्चों की रक्षा में लगी रही। उसी समय खाण्डव वन में अग्नि देव उसे जलाने आ रहे थे।
माण्डपाल को यह ज्ञात हुआ तो उन्होंने अग्नि देव की स्तुति की और कहा— “हे अग्नि! आप जगत के आधार हैं, कृपा करके मेरे बच्चों की रक्षा करें।”
अग्नि देव ने कहा— “तथास्तु।” और उन्होंने वचन दिया कि वे माण्डपाल के बच्चों को नहीं जलाएँगे।
📖 शरंग पक्षियों की कथा – भाग 3
जब खाण्डव वन में आग लगी, तब छोटे-छोटे पक्षी अत्यंत भयभीत हो गए। उनकी माता जरिता चिंतित होकर रोने लगी— “मैं तुम्हें कैसे बचाऊँ?”
बच्चों ने कहा— “माँ! तुम हमें छोड़कर अपनी रक्षा करो। यदि हम मर गए तो तुम और संतान उत्पन्न कर सकती हो।”
जरिता ने एक उपाय बताया— “यहाँ एक बिल है, उसमें छिप जाओ।” परन्तु बच्चों ने कहा— “यदि वहाँ चूहा हुआ तो वह हमें खा जाएगा।”
उन्होंने कहा— “आग में मरना चूहे द्वारा खाए जाने से बेहतर है।”
📖 शरंग पक्षियों की कथा – भाग 4
तब उन बच्चों ने अग्नि देव की स्तुति की—
“हे अग्नि! आप ही इस जगत के आधार हैं, आप ही जीवनदाता हैं, कृपया हमारी रक्षा करें।”
उनकी प्रार्थना सुनकर अग्नि देव प्रसन्न हुए और बोले— “डरो मत, मैं तुम्हारी रक्षा करूंगा।”
अग्नि देव ने अपने वचन के अनुसार उन पक्षियों को नहीं जलाया और उन्हें सुरक्षित छोड़ दिया।
📖 शरंग पक्षियों की कथा – भाग 5
आग शांत होने के बाद जरिता वापस आई और अपने बच्चों को सुरक्षित देखकर अत्यंत प्रसन्न हुई।
तभी माण्डपाल भी वहाँ पहुँचे, परन्तु बच्चों ने उनसे कोई प्रेम नहीं दिखाया।
जरिता ने क्रोधित होकर कहा— “अब तुम्हें हमारी क्या चिंता?”
माण्डपाल ने समझाया कि वे केवल संतान प्राप्ति के उद्देश्य से गए थे और उन्होंने अग्नि से उनकी रक्षा का वचन भी लिया था।
अंततः परिवार एक हो गया और सभी साथ मिलकर वहाँ से चले गए।
✨ शिक्षा: यह कथा सिखाती है कि संतान, कर्तव्य और माता-पिता का प्रेम अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही, संकट में धैर्य और विश्वास से ही रक्षा होती है।

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