विष्णु पुराण : सृष्टि और अवतार का रहस्य


🌊 विष्णु पुराण : सृष्टि और अवतार का रहस्य

(जहाँ सृष्टि, स्थिति और लय एक ही तत्त्व में विलीन हो जाते हैं)

श्रृंखला: 18 पुराण कथा-श्रृंखला
पुराण: विष्णु पुराण
मुख्य विषय: सृष्टि-उत्पत्ति, पालन, अवतार-तत्त्व
श्रेणी (Labels): Vishnu Purana, Creation Mystery, Dashavatara, Sanatana Darshan


🕉️ भूमिका : विष्णु पुराण का विशेष स्थान

विष्णु पुराण को
पुराणों में दार्शनिक रीढ़ कहा गया है।

क्योंकि—

  • यह केवल कथाएँ नहीं सुनाता
  • यह सृष्टि का तर्क समझाता है
  • यह अवतारों को इतिहास नहीं, तत्त्व के रूप में प्रस्तुत करता है

श्लोक कहता है—

“विष्णुरेव जगत्सर्वं
विष्णुर्नित्यं प्रतिष्ठितम्।”

अर्थात
जो कुछ है, वही विष्णु है।


🌌 सृष्टि का आरंभ : शून्य नहीं, चेतना से

विष्णु पुराण के अनुसार—

सृष्टि का आरंभ शून्य से नहीं,
महाचेतना (महाविष्णु) से हुआ।

क्षीरसागर की अवस्था

  • विष्णु योगनिद्रा में
  • अनंत शेष पर शयन
  • समय निष्क्रिय
  • गुण अव्यक्त

👉 यही अवस्था प्रलय के बाद की शांति है।


🌸 नाभि से कमल : सृष्टि का प्रतीक

विष्णु की नाभि से कमल उत्पन्न होता है।

यह कोई जैविक घटना नहीं—

यह प्रतीक है—

  • नाभि = केंद्र
  • कमल = सृजन
  • ब्रह्मा = कार्यशील चेतना

👉 सृष्टि ईश्वर से अलग नहीं,
ईश्वर का ही विस्तार है।


🧠 त्रिगुण और सृष्टि

विष्णु पुराण स्पष्ट करता है—

  • सत्त्व → विष्णु (पालन)
  • रज → ब्रह्मा (सृजन)
  • तम → शिव (संहार)

परंतु—

तीनों गुणों के पार
नारायण तत्त्व स्थित है।


🔱 अवतार का रहस्य : ईश्वर क्यों उतरता है?

विष्णु पुराण कहता है—

“अवतारो न जन्माय
लीला मात्रं हि केशवः।”

अवतार—

  • कर्मबंधन नहीं
  • दया का प्रवाह
  • संतुलन की लीला

👉 ईश्वर मजबूरी में नहीं,
करुणा में अवतरित होता है।


🐟 दशावतार : विकास का दार्शनिक क्रम

विष्णु पुराण में
दशावतार केवल धार्मिक नहीं—

वे चेतना-विकास का क्रम हैं:

  1. मत्स्य — जीवन का उदय
  2. कूर्म — स्थिरता
  3. वराह — पृथ्वी की रक्षा
  4. नरसिंह — अहंकार का विनाश
  5. वामन — संतुलन
  6. परशुराम — अति-शक्ति का नियंत्रण
  7. राम — मर्यादा
  8. कृष्ण — पूर्ण चेतना
  9. बुद्ध — करुणा
  10. कल्कि — धर्म का पुनर्स्थापन

⏳ समय-चक्र का रहस्य

विष्णु पुराण समय को रेखा नहीं, चक्र मानता है।

  • सत्य
  • त्रेता
  • द्वापर
  • कलि

👉 अंत = नया आरंभ

इसीलिए
ईश्वर बार-बार आते हैं।


📜 शास्त्रीय प्रमाण

  • विष्णु पुराण (1-6 अंश)
  • भागवत पुराण
  • नारायण उपनिषद
  • महाभारत — नारायणीय

उपनिषद कहता है—

“नारायणः परो ज्योतिः।”


🌼 आध्यात्मिक संदेश

1️⃣ सृष्टि ईश्वर से अलग नहीं
2️⃣ अवतार भय मिटाने के लिए हैं
3️⃣ समय चक्र है, अंत नहीं
4️⃣ भक्त और भगवान का संबंध शाश्वत है


🔚 निष्कर्ष

विष्णु पुराण
हमें यह सिखाता है—

ईश्वर केवल स्वर्ग में नहीं,
वह सृष्टि की हर गति में उपस्थित है।

जहाँ संतुलन बिगड़ता है,
वहीं से
अवतार का रहस्य प्रकट होता है।


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