PART-2 की कथा-6 : लक्ष्मी-नरसिंह — करुणा और शक्ति का रहस्य
🌺 लक्ष्मी-नरसिंह : करुणा और शक्ति का रहस्य
(जहाँ उग्रता शांत होती है और करुणा सृष्टि का संतुलन बनती है)
श्रृंखला: 18 पुराण कथा-श्रृंखला
पुराण: पद्म पुराण
सहायक ग्रंथ: भागवत, विष्णु पुराण, लक्ष्मी तंत्र
श्रेणी (Labels): Lakshmi Narasimha, Padma Purana, Bhakti-Shakti Darshan
🕉️ भूमिका : अधूरी कथा का पूर्ण सत्य
नरसिंह अवतार की कथा
हिरण्यकशिपु वध पर समाप्त नहीं होती।
वास्तव में —
वहीं से लक्ष्मी-नरसिंह तत्त्व का प्रारंभ होता है।
क्योंकि
उग्र शक्ति बिना करुणा के सृष्टि को स्थिर नहीं रख सकती।
🔥 उग्रता के बाद मौन क्यों आवश्यक था?
हिरण्यकशिपु का अंत हो चुका था,
पर नरसिंह की उग्र चेतना शांत नहीं हुई।
- देवता भयभीत थे
- ब्रह्मा मौन थे
- शिव ध्यानस्थ थे
👉 कोई भी उस उग्र रूप के समीप जाने का साहस नहीं कर सका।
यह स्थिति बताती है—
न्याय की पूर्णता के लिए
करुणा का अवतरण अनिवार्य है।
🌸 लक्ष्मी का प्रकट होना : करुणा का अवतार
तभी
महालक्ष्मी
नरसिंह के समीप आईं।
यह कोई सामान्य दृश्य नहीं था।
- लक्ष्मी = करुणा
- लक्ष्मी = सौम्यता
- लक्ष्मी = सृष्टि का संतुलन
पद्म पुराण में कहा गया है—
“शक्तिरूपा स्वयं लक्ष्मीः
शान्त्यर्थं हरिणा सह।”
अर्थात
जहाँ शक्ति उग्र हो जाती है,
वहाँ लक्ष्मी स्वयं शांति बनकर प्रकट होती हैं।
🦁 नरसिंह से लक्ष्मी-नरसिंह : तात्त्विक परिवर्तन
यह परिवर्तन
रूप का नहीं,
तत्त्व का विस्तार था।
- नरसिंह = न्याय
- लक्ष्मी = करुणा
👉 लक्ष्मी-नरसिंह =
न्याय + करुणा = पूर्ण ईश्वर
🧠 दार्शनिक रहस्य : लक्ष्मी ही शक्ति क्यों हैं?
सामान्य धारणा है—
शक्ति उग्र होती है
पर शास्त्र कहते हैं—
सर्वोच्च शक्ति करुणा है
लक्ष्मी केवल धन की देवी नहीं—
- वह चेतना की समृद्धि हैं
- वह भय-नाशिनी हैं
- वह उग्रता को धर्म में रूपांतरित करती हैं
इसलिए
लक्ष्मी के स्पर्श से ही
नरसिंह शांत हुए।
🪔 भक्त और लक्ष्मी-नरसिंह
प्रह्लाद को
नरसिंह ने वरदान नहीं दिया।
क्यों?
क्योंकि
लक्ष्मी-नरसिंह का सबसे बड़ा वरदान
भय-मुक्ति है।
लक्ष्मी-नरसिंह की उपासना—
- भय हटाती है
- दरिद्रता नहीं, अभाव-बोध मिटाती है
- अहंकार को करुणा में बदलती है
⏳ समय और संतुलन का रहस्य
नरसिंह काल के पार थे
लक्ष्मी काल में स्थिरता लाती हैं
👉 यही कारण है—
सृष्टि विनाश के बाद भी चलती है
यह संतुलन है—
- शिव का ताण्डव
- विष्णु की स्थिरता
- लक्ष्मी की करुणा
📜 शास्त्रीय प्रमाण
- पद्म पुराण — लक्ष्मी-नरसिंह संवाद
- लक्ष्मी तंत्र
- भागवत पुराण (7 स्कंध)
- नरसिंह तापिनी उपनिषद
उपनिषद कहता है—
“लक्ष्मीः नृसिंहस्य हृदये नित्या।”
अर्थात
लक्ष्मी सदा नरसिंह के हृदय में वास करती हैं।
🌼 साधना-तत्त्व
लक्ष्मी-नरसिंह मंत्र—
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं
लक्ष्मी-नृसिंहाय नमः॥
👉 भय, दरिद्रता, मानसिक अशांति नाशक
🌺 आध्यात्मिक संदेश
1️⃣ शक्ति बिना करुणा विनाशकारी है
2️⃣ करुणा बिना शक्ति निष्क्रिय है
3️⃣ ईश्वर का पूर्ण रूप दोनों का संतुलन है
4️⃣ भक्त के जीवन में भी यही संतुलन चाहिए
🔚 निष्कर्ष
लक्ष्मी-नरसिंह तत्त्व
यह सिखाता है—
ईश्वर केवल दंड नहीं देता,
वह दंड के बाद
करुणा से सृष्टि को पुनः संभालता है।
जहाँ उग्रता थमती है,
वहीं से
लक्ष्मी-नरसिंह का दिव्य शासन आरंभ होता है।
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