क्षीरसागर और योगनिद्रा का रहस्य


🌊 क्षीरसागर और योगनिद्रा का रहस्य

(जहाँ सृष्टि का अंत भी ईश्वर की चेतना में विश्राम करता है)

श्रृंखला: 18 पुराण कथा-श्रृंखला
पुराण: विष्णु पुराण
कथा क्रम: PART-3 | कथा-1
विषय: सृष्टि-प्रलय, योगनिद्रा, महाविष्णु तत्त्व
Labels: Vishnu Purana, Ksheer Sagar, Yog Nidra, Creation Mystery


🕉️ भूमिका : जब सब कुछ समाप्त हो चुका होता है

जब ब्रह्मांड में
ना आकाश रहता है,
ना पृथ्वी,
ना अग्नि,
ना वायु,
ना काल की गति—

तब भी कुछ शेष रहता है।

विष्णु पुराण कहता है—

“प्रलये सर्वनाशेऽपि
नारायणो न नश्यति।”

अर्थात
संपूर्ण प्रलय में भी
नारायण नष्ट नहीं होते।

यही अवस्था है —
क्षीरसागर में योगनिद्रा।


🌌 क्षीरसागर क्या है? (सामान्य समुद्र नहीं)

क्षीरसागर
कोई भौतिक दूध का समुद्र नहीं है।

यह है—

  • शुद्ध चेतना का महासागर
  • सत्-चित्-आनंद की स्थिति
  • गुणातीत अवस्था

👉 क्षीर = शुद्धता
👉 सागर = अनंतता

अर्थात
अनंत शुद्ध चेतना का विस्तार।


🐍 अनंत शेष पर शयन : प्रतीकात्मक सत्य

विष्णु
अनंत शेष पर शयन करते हैं।

  • शेष = जो शेष रह जाता है
  • अनंत = जिसका अंत नहीं

👉 इसका अर्थ—

जब सब नष्ट हो जाए,
तब भी जो शेष रहता है,
वही नारायण तत्त्व है।


🧘 योगनिद्रा : नींद नहीं, सर्वोच्च जागृति

यह सबसे बड़ा रहस्य है।

विष्णु सोते नहीं
बल्कि योगनिद्रा में होते हैं।

योगनिद्रा का अर्थ—

  • बाह्य सृष्टि निष्क्रिय
  • आंतरिक चेतना पूर्ण जाग्रत
  • समय स्थिर
  • कर्म बीज रूप में स्थित

उपनिषद कहता है—

“या निशा सर्वभूतानां
तस्यां जागर्ति संयमी।”

अर्थात
जिसे संसार नींद समझता है,
वहाँ योगी जाग्रत होता है।


⏳ काल का स्थगन : समय क्यों रुक जाता है?

योगनिद्रा में—

  • न भूत
  • न भविष्य
  • केवल वर्तमान चेतना

👉 इसलिए प्रलय के समय
काल स्वयं निष्क्रिय हो जाता है।

यह सिद्ध करता है—

समय ईश्वर पर आश्रित है,
ईश्वर समय पर नहीं।


🌸 नाभि से कमल : सृष्टि का पुनर्जन्म

योगनिद्रा भंग नहीं होती,
फिर भी सृष्टि प्रारंभ हो जाती है।

कैसे?

विष्णु की नाभि से कमल उत्पन्न होता है।

यह बताता है—

  • सृष्टि बाह्य प्रयास नहीं
  • चेतना का स्वाभाविक प्रवाह

कमल से
ब्रह्मा का प्राकट्य होता है।

👉 सृजन
नींद तोड़कर नहीं,
चेतना से होता है।


🧠 दार्शनिक रहस्य : ईश्वर क्यों निष्क्रिय दिखता है?

मनुष्य पूछता है—

ईश्वर कुछ करता क्यों नहीं?

विष्णु पुराण उत्तर देता है—

ईश्वर करता नहीं,
होता है।

उसकी उपस्थिति मात्र से—

  • सृष्टि चलती है
  • गुण सक्रिय होते हैं
  • जीव जन्म लेते हैं

🌼 साधना का रहस्य : योगनिद्रा क्यों महत्वपूर्ण है?

योगनिद्रा का तत्त्व
साधक को सिखाता है—

  • बाह्य शांति
  • आंतरिक जागृति
  • कर्म से मुक्ति
  • भय का लोप

इसीलिए
ऋषि योगनिद्रा को
मोक्ष की सीढ़ी कहते हैं।


📜 शास्त्रीय प्रमाण

  • विष्णु पुराण (अंश-1)
  • भागवत पुराण (3 स्कंध)
  • नारायण उपनिषद
  • योगवासिष्ठ

श्लोक—

“निद्रायां योगयुक्तोऽसौ
सृजते जगदव्ययः।”


🌺 आध्यात्मिक संदेश

1️⃣ ईश्वर कभी अनुपस्थित नहीं
2️⃣ प्रलय अंत नहीं, विश्राम है
3️⃣ सृष्टि चेतना से जन्म लेती है
4️⃣ मौन भी सृजनशील हो सकता है


🔚 निष्कर्ष

क्षीरसागर और योगनिद्रा
यह सिखाती है—

जब जीवन में सब कुछ थम जाए,
तब भी भीतर
नारायण तत्त्व जीवित रहता है।

जहाँ संसार सो जाता है,
वहीं से
ईश्वर की जागृति प्रारंभ होती है।


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