ब्रह्मा, विष्णु और महत्तत्त्व का रहस्य

ब्रह्मा, विष्णु और महत्तत्त्व का रहस्य

(विष्णु पुराण आधारित | सांख्य–वेदांत समन्वय


🔱 ब्रह्मा, विष्णु और महत्तत्त्व का रहस्य

(जहाँ सृष्टि, चेतना और कार्य एक ही मूल तत्त्व से प्रवाहित होते हैं)

श्रृंखला: 18 पुराण कथा-श्रृंखला
पुराण: विष्णु पुराण
कथा क्रम: PART-3 | कथा-2
विषय: महत्तत्त्व, त्रिगुण, ब्रह्मा-विष्णु-शिव तत्त्व
Labels: Vishnu Purana, Mahattattva, Trimurti Philosophy, Creation Mystery


🕉️ भूमिका : तीन देवता या एक तत्त्व?

सामान्य दृष्टि में—

  • ब्रह्मा = सृष्टिकर्ता
  • विष्णु = पालनकर्ता
  • शिव = संहारकर्ता

पर विष्णु पुराण स्पष्ट करता है—

ये तीन अलग-अलग ईश्वर नहीं,
बल्कि एक ही परब्रह्म के कार्यात्मक रूप हैं।


🌌 महत्तत्त्व क्या है? (सृष्टि का प्रथम स्पंदन)

प्रलय के पश्चात
जब क्षीरसागर में योगनिद्रा स्थित होती है—

तभी महत्तत्त्व का उदय होता है।

महत्तत्त्व का अर्थ—

  • महत् = महान
  • तत्त्व = मूल सिद्धांत

👉 यह वह बुद्धि-तत्त्व है
जिससे सृष्टि की योजना जन्म लेती है।

विष्णु पुराण कहता है—

“महत्तत्त्वं ततः प्रोक्तं
बुद्धिरूपं सनातनम्।”


🧠 महत्तत्त्व से अहंकार तक

महत्तत्त्व से
अहंकार उत्पन्न होता है—

  • सत्त्विक अहंकार → मन, इंद्रियाँ
  • राजसिक अहंकार → क्रिया-शक्ति
  • तामसिक अहंकार → पंचमहाभूत

👉 सृष्टि का पूरा ढांचा
अहं के विस्तार से निर्मित होता है।


🌸 विष्णु : महत्तत्त्व के अधिष्ठाता

महत्तत्त्व
स्वयं सक्रिय नहीं होता।

वह सक्रिय होता है
विष्णु की चेतना से।

इसीलिए विष्णु को कहा गया—

“अधिष्ठाता देव”

👉 बिना विष्णु के
महत्तत्त्व निष्क्रिय रहता है।


🌺 ब्रह्मा का उद्भव : कार्यशील चेतना

महत्तत्त्व जब
कार्य रूप लेता है—

तब ब्रह्मा का प्राकट्य होता है।

ब्रह्मा—

  • सृष्टि के अभियंता
  • योजनाकार
  • कार्यशील बुद्धि

कमल पर स्थित ब्रह्मा
इसका प्रतीक हैं कि—

सृष्टि चेतना के केंद्र से उत्पन्न होती है।


🔥 शिव तत्त्व : लय का रहस्य

विष्णु पुराण बताता है—

संहार विनाश नहीं,
पुनः शुद्धिकरण है।

शिव—

  • तामसिक अहं का अधिष्ठाता
  • रूपों का विसर्जन
  • पुनः शून्य की तैयारी

👉 शिव तत्त्व
सृष्टि का अंत नहीं,
नव सृजन का द्वार है।


🔺 त्रिगुण और त्रिमूर्ति का संबंध

गुण तत्त्व कार्य
सत्त्व विष्णु पालन
रज ब्रह्मा सृजन
तम शिव संहार

परंतु—

तीनों गुण
नारायण तत्त्व में स्थित हैं।


⏳ समय और महत्तत्त्व

महत्तत्त्व
काल का भी बीज है।

  • काल → गति
  • महत्तत्त्व → योजना

👉 इसलिए
काल भी विष्णु से बंधा है।


📜 शास्त्रीय प्रमाण

  • विष्णु पुराण (अंश-1,2)
  • सांख्य कारिका
  • भागवत पुराण
  • नारायण उपनिषद

उपनिषद कहता है—

“नारायणाद् ब्रह्म जायते।”


🌼 आध्यात्मिक संदेश

1️⃣ सृष्टि अराजक नहीं, योजनाबद्ध है
2️⃣ अहंकार ही बंधन का कारण है
3️⃣ विष्णु चेतना के बिना कर्म निष्फल है
4️⃣ शिव लय का नहीं, शुद्धि का प्रतीक है


🔚 निष्कर्ष

ब्रह्मा, विष्णु और महत्तत्त्व का रहस्य
यह सिखाता है—

सृष्टि तीन शक्तियों से नहीं,
एक चेतना के तीन कार्यों से चलती है।

जहाँ ब्रह्मा योजना बनाते हैं,
वहाँ विष्णु उसे धारण करते हैं,
और शिव उसे पुनः शुद्ध करते हैं।


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