सुन्द और उपसुन्द की कथा Sunda Upasunda Story Hindi तिलोत्तमा अप्सरा कहानी Hindu Mythology Story Hindi Vedic Stories Hindi तिलोत्तमा द्वारा असुरों का विनाश कैसे हुआ Sunda Upasunda full story Hindi why Sunda and Upasunda died hindu mythology demon brothers story vedic story of Tilottama
सुन्द और उपसुन्द की कथा (भाग 1)
प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु के वंश में निकुम्भ नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली दैत्य उत्पन्न हुआ। उसके दो पुत्र हुए—सुन्द और उपसुन्द। दोनों ही अत्यंत बलशाली, उग्र और दुष्ट स्वभाव के थे।
वे दोनों भाई सदा एक ही विचार रखते थे, एक ही कार्य करते थे, और सुख-दुःख में बराबर के भागीदार थे। वे कभी अलग नहीं रहते थे, मानो एक ही व्यक्ति के दो भाग हों।
तीनों लोकों पर अधिकार करने की इच्छा से उन्होंने विन्ध्य पर्वत पर जाकर कठोर तपस्या की। भूख-प्यास से व्याकुल होकर, वृक्षों की छाल पहनकर, जटाएँ धारण कर, वे अत्यंत कठिन तप करने लगे।
वे अपने शरीर का मांस काटकर अग्नि में अर्पित करते थे, वायु पर ही जीवन यापन करते थे और वर्षों तक एक पैर पर खड़े रहकर तपस्या करते रहे।
उनकी तपस्या से विन्ध्य पर्वत भी गर्म होकर धुआँ छोड़ने लगा। देवता भयभीत हो गए और उनकी तपस्या भंग करने के लिए अनेक उपाय करने लगे।
देवताओं ने सुंदर स्त्रियों और भोग-विलास के साधनों से उन्हें विचलित करने का प्रयास किया, किन्तु वे अपने संकल्प से नहीं डिगे।
अंततः ब्रह्मा स्वयं प्रकट हुए और उनसे वर मांगने को कहा।
सुन्द और उपसुन्द की कथा (भाग 2)
दोनों भाइयों ने ब्रह्मा से कहा— “हमें सभी अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान, माया की शक्ति, अपार बल और इच्छानुसार रूप बदलने की शक्ति प्राप्त हो, और हम अमर हों।”
ब्रह्मा ने उत्तर दिया— “अमरता को छोड़कर तुम्हें सब कुछ मिलेगा।”
तब उन्होंने कहा— “हमें तीनों लोकों में किसी से भी भय न हो, केवल एक-दूसरे से ही हमारा वध संभव हो।”
ब्रह्मा ने यह वर प्रदान किया।
वर प्राप्त कर वे अत्यंत शक्तिशाली हो गए और तीनों लोकों को जीतने निकल पड़े। उन्होंने देवताओं, यक्षों, राक्षसों और नागों को पराजित कर दिया।
उन्होंने यज्ञ करने वाले ब्राह्मणों और ऋषियों का भी विनाश करना शुरू कर दिया, जिससे धर्म और यज्ञ समाप्त हो गए।
पृथ्वी पर भय और अराजकता फैल गई, लोग दुखी हो गए और सभी धार्मिक कार्य बंद हो गए।
देवता और ऋषि दुखी होकर ब्रह्मा के पास गए और उनसे सहायता मांगी।
तब ब्रह्मा ने विश्वकर्मा को आदेश दिया कि वह एक ऐसी अप्सरा बनाए जो दोनों भाइयों को मोहित कर सके।
विश्वकर्मा ने तिलोत्तमा नाम की अत्यंत सुंदर अप्सरा की रचना की, जिसकी सुंदरता अनुपम थी।
सुन्द और उपसुन्द की कथा (भाग 3)
ब्रह्मा ने तिलोत्तमा से कहा— “तुम सुन्द और उपसुन्द के पास जाओ और उन्हें अपने सौंदर्य से मोहित कर उनके बीच विवाद उत्पन्न करो।”
तिलोत्तमा उनके पास गई। उस समय दोनों भाई मदिरा और भोग-विलास में लीन थे।
तिलोत्तमा को देखकर दोनों उस पर मोहित हो गए और उसे पाने के लिए झगड़ने लगे।
सुन्द ने कहा— “यह मेरी पत्नी है।”
उपसुन्द ने कहा— “नहीं, यह मेरी पत्नी है।”
दोनों क्रोध में आकर एक-दूसरे पर गदा से प्रहार करने लगे।
भीषण युद्ध में दोनों एक-दूसरे को मार डाले और वहीं गिर पड़े।
इस प्रकार दोनों दैत्य, जो सदैव एक साथ रहते थे, एक स्त्री के कारण आपस में लड़कर नष्ट हो गए।
देवताओं ने तिलोत्तमा की प्रशंसा की और ब्रह्मा ने उसे वरदान दिया कि उसका तेज इतना होगा कि कोई भी उसे अधिक समय तक देख नहीं सकेगा।
इस प्रकार सुन्द और उपसुन्द की कथा समाप्त होती है, जो अहंकार और वासना के विनाशकारी परिणाम को दर्शाती है।


0 Comments