The essences of the dusk in hindi संध्याकालीन जागरण

 

धीरे-धीरे रात समाप्त होने लगी। पूर्व दिशा के पर्वत से सूर्य उदित हुआ और आकाश में तेजी से ऊपर चढ़ने लगा।

अचानक राजमहल में एक बड़ा कोलाहल मच गया। स्त्रियाँ इधर-उधर भागने लगीं, रोती-चिल्लाती हुई— “हाय! हाय! राजा की पुत्री लापता है!”

उन्होंने हर दिशा में खोज की, लेकिन कहीं भी राजकुमारी का पता नहीं चला। अंततः वे राजा के पास पहुँचीं।

राजा यह सुनते ही रात्रि-वस्त्रों में ही दौड़ पड़े और स्वयं महल के हर कोने में खोजने लगे—परंतु कुछ भी नहीं मिला।

सभी स्थानों को उलट-पुलट देने के बाद वे रुक गए और बोले— “क्या वह अपने प्रेमी के पीछे प्राचीर पर चली गई होगी?”

“निःसंदेह, उसके पूर्व प्रेमियों की तरह वह भी लुप्त हो गया है और कभी वापस नहीं आया।”


⚔️ प्राचीर पर भयावह दृश्य

तब सभी लोग घुमावदार सीढ़ियों से ऊपर गए। राजा सबसे आगे थे।

जैसे ही उन्होंने प्राचीर पर कदम रखा— वे एक तीखी चीख के साथ भूमि पर गिर पड़े।

यह दृश्य देखकर स्त्रियाँ भय से जड़ हो गईं। वे वहीं खड़ी रहीं—पीले चेहरे, कांपते हुए।

कुछ समय बाद साहस जुटाकर वे आगे बढ़ीं और बाहर झाँका।

और जो उन्होंने देखा— वह अत्यंत हृदय विदारक था।

  • राजा का शरीर अपनी पुत्री पर गिरा हुआ था
  • थोड़ी दूरी पर अजा मुँह के बल पड़ा था

⚰️ मृत्यु का रहस्य

वे तीनों को उठाकर भीतर ले गईं और जाँच की।

कुछ समय बाद उन्होंने कहा—

“राजा का हृदय अपनी पुत्री को मृत देखकर टूट गया।”

“परंतु अन्य दोनों को सर्प ने डसा है।”


🐍 सबसे बड़ा प्रश्न

लेकिन एक रहस्य सबको विचलित कर रहा था—

  • राजकुमारी को पैर में डसा गया
  • अजा को होंठों पर

तब उन्होंने आश्चर्य से कहा—

“क्या वह सर्प को चूमने का प्रयास कर रहा था—जो उसने उसे होंठों पर डस लिया?”

“क्योंकि इतना बड़ा सर्प भी इतनी ऊँचाई तक कैसे पहुँच सकता है?”

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