भस्मासुर कथा | शिव पुराण कथा–4 | वरदान, अहंकार और विवेक का रहस्य


🙏 श्रद्धापूर्वक प्रस्तुत है —
(शिव पुराण) — वैराग्य और तत्त्वज्ञान

कथा–4 : भस्मासुर — वरदान, अहंकार और विवेक का महा–रहस्य


🕉️ भूमिका : जब तप से वर मिलता है, पर विवेक नहीं

शिव पुराण की यह कथा
सिर्फ़ एक असुर के विनाश की कहानी नहीं है।
यह कथा है —

  • तप और अहंकार के संघर्ष की
  • वरदान और विवेक के संतुलन की
  • शक्ति और मर्यादा के नियम की

“तप शक्ति देता है,
पर विवेक न हो
तो वही शक्ति
विनाश बन जाती है।”


🔥 भस्मासुर का कठोर तप

भस्मासुर —
नाम ही संकेत करता है
भस्म (नाश) की प्रवृत्ति का।

उसने घोर तप किया—

  • वर्षों तक एक पाँव पर खड़ा रहा
  • भोजन, जल, निद्रा का त्याग
  • शरीर क्षीण, पर संकल्प कठोर

उसका लक्ष्य था—

अजेय होना
सर्वशक्तिमान बनना


🔱 शिव का प्राकट्य : करुणा का स्वरूप

शिव तप से प्रसन्न हुए।

यहाँ ध्यान देने योग्य है—

  • शिव पात्र नहीं देखते
  • शिव प्रवृत्ति नहीं देखते
  • शिव केवल तप की तीव्रता देखते हैं

शिव प्रकट हुए और बोले—

“वत्स, वर माँगो।”


⚠️ भस्मासुर का वरदान : विवेक–शून्य कामना

भस्मासुर ने माँगा—

“जिसके सिर पर मैं हाथ रखूँ,
वह उसी क्षण भस्म हो जाए।”

यह वरदान—

  • सुनने में सरल
  • पर परिणाम में भयावह

शिव जानते थे —
पर शिव वर–भंग नहीं करते

वरदान दे दिया गया।


🌪️ अहंकार का उदय : वरदान का पहला शिकार

वर मिलते ही—

  • भस्मासुर का विवेक नष्ट
  • अहंकार जागृत
  • शक्ति पर नियंत्रण समाप्त

उसने सोचा—

“यदि यह शक्ति है,
तो सबसे पहले
स्वयं शिव ही
क्यों न भस्म हों?”


🏃 शिव का पलायन : लीला का आरंभ

भस्मासुर शिव के पीछे दौड़ा।
शिव भागे।

यह भागना—

  • भय नहीं
  • असमर्थता नहीं

यह थी —

लीला,
ताकि सृष्टि को
एक गहरा पाठ मिले।


🧠 दार्शनिक संकेत

घटना तात्त्विक अर्थ
भस्मासुर का वर शक्ति
शिव का पलायन लीला
असुर का पीछा अहंकार की अंधी दौड़

🌸 विष्णु का अवतरण : मोहिनी रूप

देवता विष्णु के पास पहुँचे।

विष्णु बोले—

“जहाँ विवेक नष्ट हो,
वहाँ मोह
औषधि बनता है।”

विष्णु ने
मोहिनी रूप धारण किया।


💃 मोहिनी और भस्मासुर

मोहिनी को देखकर—

  • भस्मासुर मंत्रमुग्ध
  • शक्ति विस्मृत
  • अहंकार दिशाहीन

मोहिनी ने कहा—

“यदि तुम नृत्य में
मेरा अनुकरण करो,
तभी मैं तुम्हें स्वीकार करूँगी।”


🔥 अहंकार का अंत : स्वयं का विनाश

नृत्य के क्रम में—

  • मोहिनी ने हाथ सिर पर रखा
  • भस्मासुर ने भी वैसा ही किया

क्षण मात्र में—

🔥 भस्मासुर स्वयं भस्म हो गया।


🧘 तात्त्विक रहस्य

यह कथा सिखाती है—

  • शक्ति बिना विवेक — आत्मघात
  • वरदान बिना मर्यादा — विनाश
  • अहंकार स्वयं अपना शत्रु है

“कोई देवता
असुर को नहीं मारता,
असुर
स्वयं को मारता है।”


🔱 शिव–विष्णु समन्वय

यह कथा यह भी बताती है—

  • शिव — तप और करुणा
  • विष्णु — विवेक और संरक्षण

सृष्टि चलती है
संयोजन से,
एकल शक्ति से नहीं।


🌍 आधुनिक जीवन में संदेश

  • ज्ञान बिना विनम्रता — खतरनाक
  • पद बिना संयम — पतन
  • शक्ति बिना नैतिकता — विनाश

भस्मासुर
आज भी जीवित है—

  • अहंकार में
  • अति–महत्त्वाकांक्षा में
  • विवेक–शून्य शक्ति में

🌺 सूत्र–वाक्य

“विवेकहीन शक्ति
स्वयं की चिता
स्वयं रचती है।”



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