🌺 सृष्टि का प्रथम संकल्प
(ब्रह्म पुराण की महान कथा – पूर्ण विस्तार सहित)
श्रेणी (Label): Purana Stories, Brahma Purana, Sanatan Katha
पोस्ट प्रकार: आध्यात्मिक–दार्शनिक कथा
उपयुक्त पाठक: साधक, जिज्ञासु, धर्मप्रेमी
🔱 भूमिका (प्रस्तावना)
सृष्टि की उत्पत्ति मानव के लिए सदैव रहस्य रही है।
आधुनिक विज्ञान इसे “बिग बैंग” कहता है,
परन्तु ब्रह्म पुराण इससे कहीं अधिक गहन सत्य प्रकट करता है।
पुराण कहते हैं—
सृष्टि किसी विस्फोट से नहीं,
एक दिव्य संकल्प से उत्पन्न हुई।
इसी संकल्प की कथा है—
“सृष्टि का प्रथम संकल्प”।
🌌 कथा आरंभ : जब कुछ भी नहीं था
उस समय—
- न दिन था, न रात्रि
- न आकाश था, न पृथ्वी
- न सूर्य था, न चन्द्र
- न दिशा थी, न काल
केवल परम अव्यक्त तत्त्व था—
जिसे पुराण परब्रह्म कहते हैं।
ब्रह्म पुराण में कहा गया है—
“न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं
नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः।”
(ब्रह्म पुराण – सृष्टि प्रसंग)
अर्थात—
उस अवस्था में कोई प्रकाश नहीं था,
पर फिर भी अंधकार नहीं था,
क्योंकि वह अवस्था चेतन प्रकाश थी।
🌊 प्रथम स्पंदन : ॐ का उदय
उस परम मौन में
एक सूक्ष्म स्पंदन उत्पन्न हुआ।
यह स्पंदन शब्द नहीं था,
पर आगे चलकर वही ॐ कहलाया।
“ॐ इत्येतदक्षरं ब्रह्म”
(माण्डूक्य उपनिषद)
यही ॐ
सृष्टि की बीज-ध्वनि बना।
🌱 सृष्टि का संकल्प
उस चेतना में एक विचार जागा—
“एकोऽहं बहुस्याम्”
(मैं एक हूँ, अनेक होना चाहता हूँ)
👉 यही वाक्य
सृष्टि का प्रथम संकल्प है।
यह इच्छा किसी कामना से नहीं,
बल्कि लीला से उत्पन्न हुई।
ब्रह्म पुराण स्पष्ट करता है—
ईश्वर सृष्टि इसलिए नहीं करता कि उसे कुछ चाहिए,
बल्कि इसलिए कि
आनंद स्वभाव से विस्तार चाहता है।
🔥 पंचमहाभूतों की उत्पत्ति
संकल्प के बाद क्रमशः उत्पन्न हुए—
- आकाश – स्थान और ध्वनि का आधार
- वायु – गति और प्राण
- अग्नि – तेज और परिवर्तन
- जल – जीवन और रस
- पृथ्वी – स्थिरता और आकार
ब्रह्म पुराण कहता है—
“पंचभूतात्मकं विश्वं
ब्रह्मसंकल्पसम्भवम्।”
अर्थात—
यह सम्पूर्ण विश्व पंचमहाभूतों से बना है,
और वे सभी ब्रह्म-संकल्प से उत्पन्न हुए हैं।
🪷 चेतना का विस्तार : ब्रह्मा का प्राकट्य (संकेत)
जब सृष्टि का ढाँचा बना,
तब उसी चेतना ने
सर्जक रूप धारण किया—
जिसे ब्रह्मा कहा गया।
(इसका पूर्ण वर्णन अगली कथा में आएगा)
यहाँ ब्रह्म पुराण केवल इतना संकेत देता है—
सृष्टि का संकल्प →
सृष्टि की संरचना →
सृष्टि का संचालन
🧘 दार्शनिक गहराई (Tatva Vivechan)
इस कथा से तीन गहरे सिद्धांत निकलते हैं—
1️⃣ सृष्टि जड़ नहीं है
यह चेतन संकल्प से उत्पन्न हुई है।
2️⃣ ईश्वर सृष्टि से अलग नहीं
वह स्वयं सृष्टि में व्याप्त है।
3️⃣ मानव भी उसी चेतना का अंश है
इसलिए मानव का उद्देश्य केवल भोग नहीं,
बोध है।
🌼 जीवन संदेश (Moral & Spiritual Message)
- संसार भय का स्थान नहीं, ब्रह्म की लीला है
- जब जीवन अर्थहीन लगे,
तब समझो—संकल्प से जुड़ना शेष है - जो अपने भीतर के ॐ को सुन ले,
वह सृष्टि को समझ लेता है
🔚 निष्कर्ष
“सृष्टि का प्रथम संकल्प” हमें यह सिखाता है कि—
जीवन दुर्घटना नहीं है,
यह दिव्य योजना है।
जो इसे समझ लेता है,
वही सच्चे अर्थों में सनातनी साधक बनता है।
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