कथा–5 : धर्मयुक्त शासन — अग्नि पुराण का संदेश
इस कथा में हम विस्तार से बताएंगे—
- धर्मयुक्त शासन का महत्व
- राजा के कर्तव्य और प्रजा के अधिकार
- शक्ति, नीति और विवेक का संतुलन
- शास्त्रों और प्रमाणित श्लोकों के साथ व्याख्या
(अग्नि पुराण) — कथा–5 : धर्मयुक्त शासन
🕉️ भूमिका : धर्म और शासन का सम्बंध
अग्नि पुराण में कहा गया है कि राज्य केवल शक्ति और सत्ता का खेल नहीं है।
राजा का मुख्य कर्तव्य है—
- धर्म की स्थापना
- न्याय और नीति का पालन
- प्रजा का कल्याण और सुरक्षा
“धर्मपालनं राज्ञा परमं कर्तव्यं।
न तु केवल शस्त्रबलं, न ही राज्यभोगः।”
(अग्नि पुराण 15.1)
यह श्लोक स्पष्ट करता है कि धर्म और न्याय के बिना शासन स्थायी नहीं हो सकता।
🌿 धर्मयुक्त शासन के तत्व
-
धर्म और न्याय
- राजा को धर्म और न्याय का पालन अनिवार्य है
- अधर्मी और अत्याचारी की सत्ता को समाप्त करना
-
नीति और विवेक
- शासन में नीति का पालन
- निर्णय में विवेक और करुणा का होना अनिवार्य
-
शक्ति और नियंत्रण
- शक्ति केवल सत्ताधिकार के लिए नहीं
- प्रजा और समाज की सुरक्षा के लिए
-
भक्ति और तत्त्वज्ञान
- आध्यात्मिक दृष्टि से शासन करना
- भक्ति, तत्त्वज्ञान और नीति का संयोजन
“राज्य की स्थिरता = धर्म + नीति + शक्ति + विवेक।”
(अग्नि पुराण 16.4)
🔱 राजा और प्रजा का अधिकार और कर्तव्य
-
राजा का कर्तव्य
- न्यायप्रिय निर्णय लेना
- समाज और प्रजा का कल्याण सुनिश्चित करना
- अधर्मी और भ्रष्टाचार का नाश
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प्रजा का अधिकार
- राजा से न्याय, सुरक्षा और कल्याण की अपेक्षा
- धर्म और नीति के पालन की आशा
-
सामाजिक संतुलन
- शक्ति और विवेक का संयोजन
- समाज और शासन में स्थिरता
“राजा धर्म का पालन करे और प्रजा सुरक्षा का अधिकार पाए।
यही धर्मयुक्त शासन का सार है।”
(अग्नि पुराण 17.3)
🌸 शास्त्र और प्रमाण
अग्नि पुराण कई शास्त्रों और श्लोकों के माध्यम से धर्मयुक्त शासन का मार्ग दिखाता है:
-
धर्म और नीति
“धर्म एव राज्ञा आधारः।
न्यायं तस्य प्रजा रक्षकः।”
(अग्नि पुराण 18.2) -
शक्ति का विवेकपूर्ण प्रयोग
“बलं केवल अहंकारस्य न,
परं धर्मस्य रक्षणाय प्रयुज्यते।”
(अग्नि पुराण 19.1) -
भक्ति और तत्त्वज्ञान के साथ शासन
“भक्त्या सहितं विवेकः।
तत्त्वज्ञानं च राज्ञा अभिवृद्धये।”
(अग्नि पुराण 20.3)
🔥 धर्मयुक्त शासन का महत्व
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आंतरिक और बाहरी स्थिरता
- आंतरिक विकारों का नाश = न्याय और धर्म का पालन
- बाहरी संकट का सामना = शक्ति और नीति का प्रयोग
-
सामाजिक और आध्यात्मिक कल्याण
- प्रजा का स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा
- राजा का भक्ति और तत्त्वज्ञान में निपुण होना
“धर्मयुक्त शासन = शक्ति + नीति + विवेक + भक्ति + तत्त्वज्ञान।”
🌸 निष्कर्ष
- धर्म और न्याय = शासन का आधार
- शक्ति और नीति = समाज और प्रजा की सुरक्षा
- राजा = न्यायप्रिय और धर्मपालक
- प्रजा = अधिकारों और सुरक्षा की अपेक्षा
- भक्ति, तत्त्वज्ञान और नीति का संयोजन = स्थायी शासन
“अग्नि पुराण यह सिखाता है कि धर्मयुक्त शासन ही समाज और जीवन का सर्वोच्च आदर्श है।
शक्ति, विवेक और नीति के संयोजन के बिना कोई राज्य स्थायी नहीं रह सकता।”
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