शिव पुराण कथा-1 | शिव तत्त्व, वैराग्य और परम ज्ञान

 

जैसा आपने निर्देश दिया —
अब प्रस्तुत है पूर्णतः ब्लॉग-रेडी, शास्त्रसम्मत और दार्शनिक गहराई से युक्त


PART–6 (शिव पुराण) — वैराग्य और तत्त्वज्ञान

कथा–1 : शिव — वैराग्य का साकार तत्त्व


🕉️ भूमिका : शिव कौन हैं?

शिव कोई केवल देवता नहीं,
शिव तत्त्व हैं।

जहाँ सृष्टि का आरंभ मौन से होता है
और अंत भी मौन में लीन हो जाता है —
वही शिव हैं।

शिव पुराण का मूल विषय है —
वैराग्य + ज्ञान + करुणा
तीनों का अद्वितीय समन्वय।


🔱 शिव का स्वरूप : विरोधों का अद्भुत योग

लोकिक दृष्टि तात्त्विक अर्थ
भस्म नश्वरता का बोध
जटा काल का नियंत्रण
चंद्र मन की शीतलता
त्रिनेत्र त्रिकालज्ञान
नाग प्राणशक्ति
डमरू नाद-ब्रह्म

📜 शिव पुराण, विद्येश्वर संहिता


🌿 कथा प्रारंभ : ब्रह्मा–विष्णु और स्तंभ रहस्य

एक बार ब्रह्मा और विष्णु में विवाद हुआ —

“सृष्टि का मूल कौन?”

तभी एक अनंत ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ।

न आदि, न अंत।

ब्रह्मा ऊपर गए,
विष्णु नीचे।

दोनों असफल।

तभी शिव प्रकट हुए।

📜 शिव पुराण — ज्योतिर्लिंग कथा


🧠 तात्त्विक निष्कर्ष

  • ब्रह्मा = सृष्टि
  • विष्णु = पालन
  • शिव = तत्त्व (Reality itself)

शिव न कर्ता हैं
न भोक्ता —
शिव साक्षी हैं।


🪔 वैराग्य का वास्तविक अर्थ

वैराग्य ≠ संसार त्याग
वैराग्य = आसक्ति त्याग

शिव—

  • कैलास में रहते हैं
  • फिर भी श्मशान प्रिय है
  • गृहस्थ भी हैं (पार्वती)
  • फिर भी योगी हैं

यही शिव वैराग्य है।


🌺 शिव और पार्वती : ज्ञान-शक्ति संवाद

पार्वती ने पूछा:

“मोक्ष का सरल मार्ग क्या है?”

शिव बोले:

“ज्ञान बिना वैराग्य अधूरा है
और वैराग्य बिना करुणा शुष्क।”

📜 शिव पुराण — उमा संहिता


🔥 श्मशान और कैलास का रहस्य

श्मशान कैलास
मृत्यु चेतना
अंत परम शांति
भय निर्भयता

शिव दोनों में समान हैं।


🧘 शिव और योग

  • आदियोगी = शिव
  • 112 ध्यान विधियाँ
  • नाद, बिंदु, शून्य का ज्ञान

📜 विज्ञान भैरव तंत्र (शैव परंपरा)


🌌 शिव तत्त्व का सूत्र

“जो बदलता है — वह शिव नहीं
जो साक्षी है — वही शिव है।”


📿 आधुनिक जीवन में शिव वैराग्य

  • कार्य करते हुए आसक्ति न हो
  • सफलता-असफलता में समभाव
  • भोग में विवेक
  • ज्ञान में विनम्रता

यही शिव-मार्ग है।



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