🔥 प्रह्लाद की अडिग भक्ति
(अहंकार पर भक्ति की विजय की अमर कथा)
श्रेणी (Labels): Padma Purana, Prahlada Bhakti, Vishnu Kathayen
पोस्ट प्रकार: पौराणिक-दार्शनिक कथा
उपयुक्त: साधक, विद्यार्थी, सनातन अध्येता
🕉️ भूमिका : जब भक्ति ने असुरत्व को भी पराजित कर दिया
सनातन परंपरा में यदि
भक्ति की पराकाष्ठा का उदाहरण पूछा जाए,
तो एक नाम स्वयं प्रकट होता है—
प्रह्लाद
यह कथा सिद्ध करती है कि—
रक्त, वंश या वातावरण नहीं,
श्रद्धा ही मनुष्य को दिव्य बनाती है।
👑 हिरण्यकशिपु : अहंकार का चरम
हिरण्यकशिपु—
- महान असुर राजा
- ब्रह्मा से वरदान प्राप्त
- स्वयं को ईश्वर मानने वाला
उसका उद्घोष था—
“मुझसे श्रेष्ठ कोई नहीं।”
👶 प्रह्लाद का जन्म
हिरण्यकशिपु का पुत्र था—
प्रह्लाद
परंतु आश्चर्य यह कि—
असुर कुल में जन्म लेकर भी
वह भगवान विष्णु का परम भक्त था।
🧘 गर्भ से ही भक्ति
जब प्रह्लाद गर्भ में थे,
उनकी माता कयाधु
महर्षि नारद के आश्रम में रहीं।
नारद ने
नारायण भक्ति का उपदेश दिया।
पद्म पुराण कहता है—
“गर्भस्थोऽपि हरिं स्मृत्वा
भक्तो जातः प्रह्लादकः।”
🏫 गुरुकुल में विष्णु-नाम
गुरुकुल में
जब गुरु असुर-नीति सिखाते,
प्रह्लाद कहते—
“नारायण ही सत्य हैं।”
उन्होंने अन्य बालकों को भी सिखाया—
श्रवणं कीर्तनं विष्णोः
😡 पिता-पुत्र संघर्ष
हिरण्यकशिपु ने पूछा—
“तुझे सबसे श्रेष्ठ कौन लगता है?”
प्रह्लाद बोला—
“भगवान विष्णु।”
यह सुनकर
हिरण्यकशिपु का क्रोध
आकाश छूने लगा।
🔥 यातनाओं की श्रृंखला
हिरण्यकशिपु ने—
- पहाड़ से गिरवाया
- विष पिलवाया
- हाथियों से कुचलवाया
- सर्पों में डलवाया
- अग्नि में जलवाया
पर—
हरि-स्मरण से प्रह्लाद अडिग रहा।
🔥 होलिका दहन
हिरण्यकशिपु की बहन
होलिका को वरदान था
कि वह अग्नि में न जले।
प्रह्लाद को
उसकी गोद में बैठाकर
अग्नि में डाल दिया गया।
पर—
- होलिका जल गई
- प्रह्लाद सुरक्षित रहा
👉 यही होलिका दहन का आध्यात्मिक मूल है।
🦁 नरसिंह अवतार
हिरण्यकशिपु ने पूछा—
“क्या तेरा विष्णु इस स्तंभ में है?”
प्रह्लाद बोला—
“हाँ।”
क्षण मात्र में—
स्तंभ फटा
नरसिंह भगवान प्रकट हुए।
⚡ अहंकार का अंत
- न दिन, न रात
- न घर, न बाहर
- न अस्त्र, न शस्त्र
नरसिंह ने
हिरण्यकशिपु का वध किया।
🙏 प्रह्लाद का वैराग्य
भगवान ने वर माँगने को कहा।
प्रह्लाद बोले—
“मैं व्यापारी नहीं
जो भक्ति के बदले कुछ माँगूँ।”
🧠 दार्शनिक विवेचन
1️⃣ अहंकार = पतन
2️⃣ भक्ति = संरक्षण
3️⃣ ईश्वर सर्वत्र हैं
4️⃣ भक्त के लिए भगवान नियम तोड़ते हैं
📜 शास्त्रीय प्रमाण
- पद्म पुराण – प्रह्लाद चरित्र
- भागवत पुराण (7 स्कंध)
- विष्णु पुराण
- नारद पुराण
🌼 जीवन संदेश
- बालक भी गुरु बन सकता है
- अत्याचार भक्ति को नहीं तोड़ सकता
- ईश्वर हर स्तंभ में हैं
- सच्ची श्रद्धा अमर है
🔚 निष्कर्ष
प्रह्लाद की अडिग भक्ति
यह प्रमाण है कि—
जहाँ भक्ति है,
वहाँ भगवान स्वयं प्रकट होते हैं।
नरसिंह भगवान
आज भी यह संदेश देते हैं—
“भक्त सुरक्षित है।”
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